Transliteration: (Yas'aloonaka 'anilkhamri walmaisiri qul feehimaaa ismun kabeerunw wa manaafi'u linnaasi wa ismuhumaa akbaru min naf'ihimaa; wa yas'aloonaka maaza yunfiqoona qulil-'afwa; kazaalika yubaiyinul laahu lakumul-aayaati la'allakum tatafakkaroon)
✅ [516] जुआ और शराब — एक विनाशकारी शक्ति
“मइसर” का मतलब है जुआ, जिसमें किसी की हानि से दूसरे का लाभ होता है।
🔹 किसी भी प्रकार का जुआ जो मौका या किस्मत पर आधारित हो, मना है, जिसमें आधुनिक जुआ, सट्टा, या अटकलबाज़ी शामिल हैं।
🔹 ताश के खेल, शतरंज या अन्य कोई ऐसा खेल जो मौका आधारित है, उसे भी जुआ माना जाता है और इसलिए निषिद्ध है।
✅ [517] शराब और जुआ बड़े पाप हैं
शराब और जुआ में कुछ लाभ हो सकते हैं (जैसे कि नासमझ लोग उनसे अस्थायी लाभ उठाते थे), पर उनका नुकसान बहुत बड़ा है।
🔹 इस आयत में साफ़ कहा गया है कि इनका पाप उनके लाभ से कहीं बड़ा है।
🔹 यह आयत शराब के हराम घोषित होने के बाद आई, यह बताने के लिए कि शुरू में इसे कुछ हद तक सहन किया गया था, लेकिन बाद में इसका नुकसान स्पष्ट होने पर यह पूरी तरह से मना कर दिया गया।
✅ [518] शराब और जुए का नुकसान उनके लाभ से अधिक है
इस आयत में दो बातें हैं:
✅ [519] जरूरतों से ऊपर जो बचता है, वही खर्च करो — दान और अतिरिक्त खर्च
खर्च करने के सवाल के जवाब में कहा गया है कि जरूरतों के बाद जो बचता है, वही दान में दिया जाए।
🔹 यदि यह जज़िया (ज़कात) के संदर्भ में हो, तो इसे अन्य जगहों पर ज़कात के विशेष नियमों से बदला गया है।
🔹 लेकिन अगर यह सदक़ा (स्वैच्छिक दान) के लिए है, तो यह आज भी मान्य है, और जरूरत से ऊपर खर्च करना एक नेक अमल है।
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