Transliteration: (Lillazeena yu'loona min nisaaa'ihim tarabbusu arba'ati ashhurin fain faaa'oo fa innal laaha Ghafoorur Raheem)
यह आयत उस प्रक्रिया का उल्लेख करती है जिसे 'इला' कहा जाता है, जिसमें पति अपनी पत्नी से शारीरिक संबंध बनाने की क़स्म खाता है।
मूल विचार:
यदि पति चार महीने के भीतर अपनी पत्नी से संबंधों को पुनः स्थापित कर लेता है, तो अल्लाह उस क़स्म को माफ़ कर देता है और इसे सुलह माना जाता है।
तफ़सीर:
सारांश:
यह आयत एक व्यक्ति को यह सिखाती है कि ग़लतियों के बावजूद अगर वह अपना रवैया सुधारता है और पुनः अच्छे रिश्ते की ओर लौटता है, तो अल्लाह उसकी माफ़ी करता है। यह रिश्तों को सुधारने और नफरतों को खत्म करने की दिशा में प्रेरित करती है।
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