Transliteration: (Yu'til Hikmata mai yashaaa'; wa mai yu'tal Hikmata faqad ootiya khairan kaseeraa; wa maa yazzakkaru illaaa ulul albaab)
यहाँ "हिकमत" से मुराद है:
➡️ यह एक ख़ास नेमत है, जो हर किसी को किताबें पढ़कर नहीं मिलती, बल्कि अल्लाह जिसे चाहता है, उसे देता है।
जैसे एक रेडियो को सही फ़्रीक्वेंसी पर ट्यून किया जाए तभी आवाज़ साफ़ सुनाई देती है — उसी तरह इंसान को अंदर से तैयार होना चाहिए कि वो क़ुरआन की बातों को समझ सके।
ये अल्लाह की रहमत से होता है।
अल्लाह फ़रमाते हैं कि "जिसे हिकमत दी गई, उसे बहुत बड़ी नेमत मिली।"
यहाँ हमें ये समझाया गया:
➡️ हज़रत मुहम्मद ﷺ सबसे ज़्यादा इल्म रखने वाले थे, और उन्होंने फ़रमाया:
"मुझे हर चीज़ का साफ़ इल्म दिया गया।"
इसलिए, जो इंसान दूसरों को दीन की बातें सिखाता है, वो सिर्फ़ इल्म नहीं देता, बल्कि अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत बाँटता है।
नतीजा:
जो इंसान अक़्ल और समझ रखता है, वो ही इन बातों से सबक लेता है।
बाकी लोग चाहे कितना भी पढ़ें, अगर दिल में नीयत और अक़्ल नहीं, तो नसीहत असर नहीं करती।
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