कुरान - 2:268 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

268
ٱلشَّيۡطَٰنُ يَعِدُكُمُ ٱلۡفَقۡرَ وَيَأۡمُرُكُم بِٱلۡفَحۡشَآءِۖ وَٱللَّهُ يَعِدُكُم مَّغۡفِرَةٗ مِّنۡهُ وَفَضۡلٗاۗ وَٱللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٞ

Transliteration: (Ash Shaitaanu ya'idukumul faqra wa ya'murukum bilfahshaaa'i wallaahu ya'idukum maghfiratam minhu wa fadlaa; wallaahu Waasi'un 'Aleem)

268. शैतान तुम्हें तंगदस्ती (ग़रीबी) से डराता है और बेहयाई (बुरे कामों) का हुक्म देता है [707], जबकि अल्लाह तुम्हें अपने तरफ़ से मग़फ़िरत (बख़्शिश) और फ़ज़ल (रहमत व बरकत) का वादा करता है। निश्चय ही अल्लाह बड़ी गुंजाइश वाला (हर चीज़ देने वाला) और सब कुछ जानने वाला है [708]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 268 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[707] शैतान का धोखा — ग़रीबी का डर और बेहयाई की दावत

इस आयत में शैतान की दो बड़ी चालें बताई गई हैं:

  1. "तंगदस्ती का डर" — जब इंसान अल्लाह की राह में खर्च करना चाहता है, तो शैतान उसे फुसलाता है:
    "अगर तुम दोगे तो खुद क्या करोगे?"
    ये बस वस्वसा (भीतर से आने वाला भ्रम) होता है।
  2. "बुरे कामों की तरफ़ बुलाना" — जैसे:
    • फ़िज़ूलख़र्ची,
    • बेहयाई (शर्मनाक काम),
    • और हर वो खर्च जो अल्लाह की नाफ़रमानी में हो।

शैतान की चाल ये है कि वह असली भलाई से रोकता है और बुराई की तरफ़ दिल लगाता है।

[708] अल्लाह का वादा — बख़्शिश और बरकत

इसके बरअक्स, अल्लाह का वादा है:

  • मग़फ़िरत (बख़्शिश): अगर इंसान अल्लाह की राह में देता है, तो उसके गुनाह माफ़ होते हैं।
  • फ़ज़ल (बरकत और रिज़्क़): अल्लाह दुनिया और आख़िरत दोनों में उसे कई गुना ज्यादा अता करता है।

👉 यहाँ अल्लाह के दो नाम बहुत अहम हैं:

  • "वासी‘" (हर चीज़ देने वाला): बताता है कि अल्लाह के ख़ज़ाने में कमी नहीं है।
    दान देने से माल घटता नहीं, बढ़ता है।
  • "अलीम" (हर बात जानने वाला): अल्लाह हमारी नीयत, दिल की हालत, और अमल — सब जानता है।
    इसलिए इनसाफ़ से बदला देता है।

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