Transliteration: (In tubdus sadaqaati fani'immaa hiya wa in tukhfoohaa wa tu'toohal fuqaraaa'a fahuwa khayrul lakum; wa yukaffiru 'ankum min saiyi aatikum; wallaahu bimaa ta'maloona Khabeer)
अल्लाह फ़रमाते हैं कि:
"अगर तुम सदक़ा खुले तौर पर दो तो यह भी अच्छी बात है।"
यहाँ दो बातों की तरफ़ इशारा है:
💡 कभी-कभी, नाम से दान देना, जैसे मस्जिद या मदरसे में — अगर दूसरों को तशवीक़ (प्रेरणा) देने के लिए हो, तो वो भी अच्छा है।
👉 सहाबा किराम (रज़ि.अ) ने भी कई बार खुले तौर पर दान दिया — जैसे हज़रत उस्मान (रज़ि.अ) ने ज़रूरत के वक़्त क़ाफ़िला भर माल दान किया, और नबी ﷺ ने उन्हें जन्नत की बशारत दी।
"अगर तुम ग़रीबों को छुपाकर दो, तो ये तुम्हारे लिए ज़्यादा बेहतर है। और अल्लाह तुम्हारे कुछ गुनाह माफ़ कर देगा।"
इसका मतलब:
➡️ यहाँ "कुछ गुनाह" से मुराद है — सग़ीरा गुनाह (छोटे गुनाह)।
कबीरा गुनाह (बड़े गुनाह) के लिए तो तौबा करना ज़रूरी है।
🔹 सदक़ा:
सबक:
सदक़ा दो — चाहे खुला हो या छुपा, लेकिन नीयत सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा हो।
छुपकर देने में ज़्यादा सवाब और अल्लाह की मग़फ़िरत है।
और याद रखो — अल्लाह तुम्हारे हर अमल से वाक़िफ़ है।
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