कुरान - 48:21 सूरह अल-फत्ह अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
وَأُخۡرَىٰ لَمۡ تَقۡدِرُواْ عَلَيۡهَا قَدۡ أَحَاطَ ٱللَّهُ بِهَاۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٗا

Transliteration: (Wa ukhraa lam taqdiroo 'alaihaa qad ahaatal laahu bihaa; wa kaanal laahu 'alaa kulli shai'in qadeera)

और दूसरी फ़तहें भी हैं जिन पर अभी तुम्हारा क़ाबू नहीं हुआ [62], वे अल्लाह के इल्म व इख़्तियार में हैं। और अल्लाह हर चीज़ पर पूरी कुदरत रखने वाला है! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फत्ह आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-फ़तह तफ़सीर - आयत 21

"और दूसरी फ़तहें भी हैं जिन पर अभी तुम्हारा क़ाबू नहीं हुआ [62], वे अल्लाह के इल्म व इख़्तियार में हैं। और अल्लाह हर चीज़ पर पूरी कुदरत रखने वाला है!"


[62] मुस्तक़बिल की अज़ीम फ़तूहात — फ़तह-ए-मक्का, कैसर व किसरा

इससे मुराद वे अज़ीम फ़तहें हैं जो उस वक़्त मुसलमानों की सोच से भी परे थीं—जैसे फ़तह-ए-मक्का, और बाद में हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु अन्हु के दौर-ए-ख़िलाफ़त में ईरान (किसरा) और रोम (क़ैसर) की सल्तनतों की फ़तह।

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह आयत हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु अन्हु की अज़ीम ख़िलाफ़त और फ़तूहात की पेशीनगोई है जिसे अल्लाह ने अपने फ़ज़ल से सच कर दिखाया।

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