कुरान - 48:23 सूरह अल-फत्ह अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
سُنَّةَ ٱللَّهِ ٱلَّتِي قَدۡ خَلَتۡ مِن قَبۡلُۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّةِ ٱللَّهِ تَبۡدِيلٗا

Transliteration: (Sunnatal laahil latee qad khalat min qablu wa lan tajida lisunnatil laahi tabdeelaa)

यह अल्लाह का दस्तूर है जो पहले से चला आ रहा है [65], और तुम अल्लाह के दस्तूर में हरगिज़ कोई बदलाव नहीं पाओगे [66]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फत्ह आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-फ़तह तफ़सीर - आयत 23

"यह अल्लाह का दस्तूर है जो पहले से चला आ रहा है [65], और तुम अल्लाह के दस्तूर में हरगिज़ कोई बदलाव नहीं पाओगे [66]!"


[65] सुन्नत-ए-इलाही (अल्लाह का अटल क़ानून)

अल्लाह का यह क़ानून हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के ज़माने से चला आ रहा है कि जब भी हक़ और बातिल का आमना-सामना होता है, तो अल्लाह हमेशा अपने नबियों और सच्चे मोमिनों को ही ग़लबा अता फ़रमाता है और काफ़िरों को रुसवा करता है।


[66] इलाही क़ानून में कोई तब्दीली नहीं

अल्लाह का यह दस्तूर कभी बदल नहीं सकता; हक़ हमेशा बातिल पर भारी रहेगा।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now