Transliteration: (Wa Huwal lazee kaffa aydiyahum 'ankum wa aydiyakum 'anhum bibatni Makkata mim ba'di an azfarakum 'alaihim; wa kaanal laahu bimaa ta'maloona Baseera)
"और वही है जिसने मक्का की वादी में उनके हाथों को तुमसे और तुम्हारे हाथों को उनसे रोक दिया [67], इसके बाद कि उसने तुम्हें उन पर ग़लबा दे दिया था। और अल्लाह तुम्हारे आमाल को देख रहा है [68]!"
हुदैबिया के मौक़े पर मक्का के अस्सी (80) हथियारबंद मुशरिकीन ने रात के अंधेरे में मुसलमानों के पड़ाव पर अचानक हमला करने की साज़िश रची ताकि सुलह टूट जाए और जंग छिड़ जाए। लेकिन सहाबा किराम ने होशियारी से उन सभी अस्सी मुशरिकीन को ज़िंदा पकड़ लिया।
हुज़ूर अकरम ﷺ ने अपनी असीम रहमत का इज़हार फ़रमाते हुए उन सभी को बिना किसी सज़ा या फ़िदाए के आज़ाद कर दिया। इस तरह अल्लाह ने जंग और ख़ून-ख़राबे को टाल दिया।
अल्लाह तआला मुसलमानों के सब्र, इताअत और रहमदिली को ख़ूब देख रहा था और उसी के अनुसार उन्हें नवाज़ रहा था।
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