कुरान - 48:1 सूरह अल-फत्ह अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
إِنَّا فَتَحۡنَا لَكَ فَتۡحٗا مُّبِينٗا

Transliteration: (Innaa fatahnaa laka Fatham Mubeenaa)

बेशक हमने आपके लिए एक खुली फ़तह (जीत) का फ़ैसला फ़रमा दिया [1]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फत्ह आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-फ़तह तफ़सीर - आयत 1

"बेशक हमने आपके लिए एक खुली फ़तह (जीत) का फ़ैसला फ़रमा दिया [1]!"


[1] सुलह-ए-हुदैबिया — खुली फ़तह (फ़तहे मुबीन)

तमाम मुफ़स्सिरीन और सहाबा किराम का इस पर इत्तिफ़ाक़ है कि यहाँ 'फ़तहे मुबीन' से मुराद सुलह-ए-हुदैबिया है। हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु अन्हु ने अर्ज़ किया: "या रसूलुल्लाह! क्या यह भी फ़तह है?" हुज़ूर अकरम ﷺ ने फ़रमाया: "हाँ! क़सम है उस ज़ात की जिसके क़ब्ज़ा-ए-कुदरत में मेरी जान है, यह बहुत बड़ी फ़तह है।"

सुलह-ए-हुदैबिया को फ़तह इसलिए फ़रमाया गया क्योंकि:

  • इसके ज़रिए काफ़िरों और मुसलमानों के बीच जंग बंद हुई और लोगों को एक-दूसरे से मिलने-जुलने और इस्लाम की ख़ूबियों को समझने का मौक़ा मिला।
  • हुदैबिया के बाद केवल दो सालों के अंदर इतने लोग मुसलमान हुए जितने इस्लाम के पिछले अट्ठारह सालों में भी नहीं हुए थे।
  • इसी सुलह ने आगे चलकर फ़तह-ए-मक्का का दरवाज़ा खोला जहाँ बिना ख़ून-ख़राबे के हज़ारों लोग इस्लाम में दाख़िल हुए।

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