Transliteration: (Innaa fatahnaa laka Fatham Mubeenaa)
"बेशक हमने आपके लिए एक खुली फ़तह (जीत) का फ़ैसला फ़रमा दिया [1]!"
तमाम मुफ़स्सिरीन और सहाबा किराम का इस पर इत्तिफ़ाक़ है कि यहाँ 'फ़तहे मुबीन' से मुराद सुलह-ए-हुदैबिया है। हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु अन्हु ने अर्ज़ किया: "या रसूलुल्लाह! क्या यह भी फ़तह है?" हुज़ूर अकरम ﷺ ने फ़रमाया: "हाँ! क़सम है उस ज़ात की जिसके क़ब्ज़ा-ए-कुदरत में मेरी जान है, यह बहुत बड़ी फ़तह है।"
सुलह-ए-हुदैबिया को फ़तह इसलिए फ़रमाया गया क्योंकि:
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