कुरान - 48:4 सूरह अल-फत्ह अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
هُوَ ٱلَّذِيٓ أَنزَلَ ٱلسَّكِينَةَ فِي قُلُوبِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ لِيَزۡدَادُوٓاْ إِيمَٰنٗا مَّعَ إِيمَٰنِهِمۡۗ وَلِلَّهِ جُنُودُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمٗا

Transliteration: (Huwal lazeee anzalas sakeenata fee quloobil mu'mineena liyazdaadooo eemaanamma'a eemaanihim; wa lillaahi junoodus samawaati wal ard; wa kaanal laahu 'Aleeman Hakeemaa)

वही है जिसने मोमिनों के दिलों में सुकून (सकीना) उतारा [7] ताकि वे अपने ईमान के साथ और ईमान बढ़ा लें [8]। और आसमानों और ज़मीन के सारे लश्कर अल्लाह ही के हैं [9]। और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, हिकमत वाला है [10]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फत्ह आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-फ़तह तफ़सीर - आयत 4

"वही है जिसने मोमिनों के दिलों में सुकून (सकीना) उतारा [7] ताकि वे अपने ईमान के साथ और ईमान बढ़ा लें [8]। और आसमानों और ज़मीन के सारे लश्कर अल्लाह ही के हैं [9]। और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, हिकमत वाला है [10]!"


[7] दिलों में सकीना (रूहानी सुकून) का नुज़ूल

जब हुदैबिया में ज़ाहिरी शर्तें मुसलमानों को सख़्त लग रही थीं, तो अल्लाह तआला ने सहाबा किराम के दिलों में ख़ास रूहानी तसल्ली और सुकून (सकीना) नाज़िल फ़रमाया, जिससे उनकी सारी बेचैनी दूर हो गई और वे हुज़ूर ﷺ के हर फ़ैसले पर पूरी तरह राज़ी और मुतमइन हो गए।


[8] ईमान पर ईमान की तरक़्क़ी

यहाँ पहले 'ईमान' से मुराद बातिनी इत्मीनान और दूसरे से मुराद कामिल यक़ीन है। अल्लाह ने उनके दिलों के सुकून में भी इज़ाफ़ा फ़रमाया और उनके अक़ीदे व यक़ीन को भी पहाड़ जैसी मज़बूती अता फ़रमाई।


[9] आसमानों और ज़मीन के लश्कर

आसमान के फ़रिश्ते, ज़मीन के जानवर, हवा, मिट्टी, पानी—सब अल्लाह के सिपाही हैं। वह जब चाहे अपने महबूब ﷺ की नुसरत के लिए किसी भी मख़लूक़ को हुक्म दे सकता है, जैसा कि बद्र में फ़रिश्तों से मदद की और अहज़ाब में तेज़ हवा के तूफ़ान से काफ़िरों के लश्कर को उखाड़ फेंका।


[10] इलाही हिकमत और ख़्वाब की सच्चाई

अल्लाह ने पहले अपने हबीब ﷺ को उमरे का ख़्वाब दिखाया, फिर हुदैबिया की सुलह कराई और फिर शानदार फ़तह अता की। इस पूरे सिलसिले में ऐसी अनगिनत इलाही हिकमतें थीं जिन्हें आम इंसानी अक़्ल नहीं समझ सकती थी।

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