कुरान - 48:6 सूरह अल-फत्ह अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
وَيُعَذِّبَ ٱلۡمُنَٰفِقِينَ وَٱلۡمُنَٰفِقَٰتِ وَٱلۡمُشۡرِكِينَ وَٱلۡمُشۡرِكَٰتِ ٱلظَّآنِّينَ بِٱللَّهِ ظَنَّ ٱلسَّوۡءِۚ عَلَيۡهِمۡ دَآئِرَةُ ٱلسَّوۡءِۖ وَغَضِبَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِمۡ وَلَعَنَهُمۡ وَأَعَدَّ لَهُمۡ جَهَنَّمَۖ وَسَآءَتۡ مَصِيرٗا

Transliteration: (Wa yu'azzibal munaafiqeena walmunaafiqaati wal mushrikeena walmushrikaatiz zaaanneena billaahi zannas saw'; 'alaihim daaa'iratus saw'i wa ghadibal laahu 'alaihim wa la'anahum wa a'adda lahum jahannama wa saaa' at maseeraa)

और ताकि वह मुनाफ़िक़ मर्दों और मुनाफ़िक़ औरतों, और मुशरिक मर्दों और मुशरिक औरतों को अज़ाब दे [14], जो अल्लाह के बारे में बुरा गुमान (सोच) रखते हैं [15]। उन्हीं पर गर्दिश-ए-बद (बुरी क़िस्मत) है [16], और उन पर अल्लाह का ग़ज़ब है, और उसने उन पर लानत की है और उनके लिए जहन्नम तैयार कर रखी है, और वह बहुत बुरा ठिकाना है! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फत्ह आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-फ़तह तफ़सीर - आयत 6

"और ताकि वह मुनाफ़िक़ मर्दों और मुनाफ़िक़ औरतों, और मुशरिक मर्दों और मुशरिक औरतों को अज़ाब दे [14], जो अल्लाह के बारे में बुरा गुमान (सोच) रखते हैं [15]। उन्हीं पर गर्दिश-ए-बद (बुरी क़िस्मत) है [16], और उन पर अल्लाह का ग़ज़ब है, और उसने उन पर लानत की है और उनके लिए जहन्नम तैयार कर रखी है, और वह बहुत बुरा ठिकाना है!"


[14] मुनाफ़िक़ों और मुशरिकीन की सज़ा

अल्लाह तआला ने मुनाफ़िक़ों और मुशरिकीन के मर्दों और औरतों दोनों का ज़िक्र फ़रमाया, क्योंकि इस्लाम के ख़िलाफ़ साज़िशों और नफ़रत फैलाने में दोनों बराबर के शरीक थे।


[15] अल्लाह के बारे में बदगुमानी (बुरी सोच)

उनकी बदगुमानी यह थी कि जब हुज़ूर ﷺ और सहाबा हुदैबिया के लिए निकले, तो मुनाफ़िक़ों ने सोचा कि मुसलमान मक्का के मुशरिकीन के मुक़ाबले में बचकर वापस नहीं आ सकेंगे और इस्लाम का नामोनिशान मिट जाएगा। उन्होंने सोचा कि अल्लाह अपने नबी की मदद नहीं करेगा।


[16] दायरा-ए-सूअ (बुराई का चक्कर उन्हीं पर उलट पड़ना)

वे मुसलमानों के लिए जिस तबाही और हलाकत का इंतज़ार कर रहे थे, अल्लाह ने उसी बर्बादी और ज़िल्लत को उनके अपने सरों पर उलट दिया। दुनिया में भी वे ज़लील हुए और आख़िरत में उन पर अल्लाह का ग़ज़ब और जहन्नम का अज़ाब है।

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