Transliteration: (Wa yu'azzibal munaafiqeena walmunaafiqaati wal mushrikeena walmushrikaatiz zaaanneena billaahi zannas saw'; 'alaihim daaa'iratus saw'i wa ghadibal laahu 'alaihim wa la'anahum wa a'adda lahum jahannama wa saaa' at maseeraa)
"और ताकि वह मुनाफ़िक़ मर्दों और मुनाफ़िक़ औरतों, और मुशरिक मर्दों और मुशरिक औरतों को अज़ाब दे [14], जो अल्लाह के बारे में बुरा गुमान (सोच) रखते हैं [15]। उन्हीं पर गर्दिश-ए-बद (बुरी क़िस्मत) है [16], और उन पर अल्लाह का ग़ज़ब है, और उसने उन पर लानत की है और उनके लिए जहन्नम तैयार कर रखी है, और वह बहुत बुरा ठिकाना है!"
अल्लाह तआला ने मुनाफ़िक़ों और मुशरिकीन के मर्दों और औरतों दोनों का ज़िक्र फ़रमाया, क्योंकि इस्लाम के ख़िलाफ़ साज़िशों और नफ़रत फैलाने में दोनों बराबर के शरीक थे।
उनकी बदगुमानी यह थी कि जब हुज़ूर ﷺ और सहाबा हुदैबिया के लिए निकले, तो मुनाफ़िक़ों ने सोचा कि मुसलमान मक्का के मुशरिकीन के मुक़ाबले में बचकर वापस नहीं आ सकेंगे और इस्लाम का नामोनिशान मिट जाएगा। उन्होंने सोचा कि अल्लाह अपने नबी की मदद नहीं करेगा।
वे मुसलमानों के लिए जिस तबाही और हलाकत का इंतज़ार कर रहे थे, अल्लाह ने उसी बर्बादी और ज़िल्लत को उनके अपने सरों पर उलट दिया। दुनिया में भी वे ज़लील हुए और आख़िरत में उन पर अल्लाह का ग़ज़ब और जहन्नम का अज़ाब है।
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