Transliteration: (Innaaa arsalnaaka shaahi danw wa mubashshiranw wa nazeera)
"बेशक हमने आपको गवाह (हाज़िर व नाज़िर) बनाकर भेजा है [18], और खुशख़बरी देने वाला और डर सुनाने वाला बनाकर भेजा है [19]!"
लफ़्ज़ 'शाहिद' का अर्थ है गवाह और मुशाहिदा करने वाला। शरीअत में गवाही उसी की क़बूल होती है जो वाक़िये को अपनी आँखों से देखे।
अहले-सुन्नत के अज़ीम इमाम हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि हुज़ूर अकरम ﷺ अपनी उम्मत के तमाम आमाल, नीयत और कैफ़ियत का मुशाहिदा फ़रमा रहे हैं। आप क़यामत के दिन पिछली तमाम उम्मतों और अंबिया के हक़ में भी गवाही देंगे और अपनी उम्मत के ईमान और आमाल पर भी गवाह होंगे। इसलिए हुज़ूर ﷺ को हाज़िर व नाज़िर मानना कुरआन की इस आयत से पूरी तरह साबित है।
आप ईमान लाने वालों और नेकी करने वालों को जन्नत और रज़ा-ए-इलाही की खुशख़बरी देने वाले (मुबशशिर) हैं, और कुफ़्र व नाफ़रमानी करने वालों को जहन्नम के दर्दनाक अज़ाब से आगाह करने वाले (नज़ीर) हैं।
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