कुरान - 48:20 सूरह अल-फत्ह अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
وَعَدَكُمُ ٱللَّهُ مَغَانِمَ كَثِيرَةٗ تَأۡخُذُونَهَا فَعَجَّلَ لَكُمۡ هَٰذِهِۦ وَكَفَّ أَيۡدِيَ ٱلنَّاسِ عَنكُمۡ وَلِتَكُونَ ءَايَةٗ لِّلۡمُؤۡمِنِينَ وَيَهۡدِيَكُمۡ صِرَٰطٗا مُّسۡتَقِيمٗا

Transliteration: (Wa'adakumul laahu ma ghaanima kaseeratan taakhuzoo nahaa fa'ajjala lakum haazihee wa kaffa aydiyan naasi 'ankum wa litakoona aayatal lilmu'mineena wa yahdiyakum siraatam mustaqeema)

अल्लाह ने तुमसे बहुत से माले-ग़नीमत का वादा फ़रमाया है जिसे तुम हासिल करोगे [57]। तो उसने यह (ख़ैबर का माल) तुम्हें जल्दी अता फ़रमा दिया [58] और लोगों के हाथों को तुमसे रोक दिया [59], ताकि यह मोमिनों के लिए एक खुली निशानी बन जाए [60] और वह तुम्हें सीधे रास्ते पर चलाए [61]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फत्ह आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-फ़तह तफ़सीर - आयत 20

"अल्लाह ने तुमसे बहुत से माले-ग़नीमत का वादा फ़रमाया है जिसे तुम हासिल करोगे [57]। तो उसने यह (ख़ैबर का माल) तुम्हें जल्दी अता फ़रमा दिया [58] और लोगों के हाथों को तुमसे रोक दिया [59], ताकि यह मोमिनों के लिए एक खुली निशानी बन जाए [60] और वह तुम्हें सीधे रास्ते पर चलाए [61]!"


[57] 'मग़ानिमा कसीरह' (बेशुमार ग़नीमतें)

अल्लाह ने मुसलमानों से क़यामत तक होने वाली अनगिनत फ़तूहात और माले-ग़नीमत का वादा फ़रमाया। चूँकि यह माल अल्लाह की रज़ा की राह में हासिल हुआ, इसलिए इसे 'कसीर' (बड़ा और बरकत वाला) फ़रमाया गया।


[58] ख़ैबर की फ़ौरी अता

अल्लाह ने इस वादे की पहली किस्त के तौर पर ख़ैबर की शानदार दौलत फ़ौरन मुसलमानों की झोली में डाल दी।


[59] दुश्मनों के हाथों को रोक देना

जब मुसलमान ख़ैबर में थे, तो मदीना पर हमला करने के लिए बनू असद और ग़तफ़ान जैसे कई क़बीले घात लगाए बैठे थे। लेकिन अल्लाह ने उनके दिलों में मुसलमानों का ऐसा ख़ौफ़ और रोब डाल दिया कि वे अपने घरों से बाहर निकलने की हिम्मत न कर सके और उनके हाथ बंधे रह गए।


[60] मोमिनों के लिए इलाही दलील और बशारत

यह इस बात की खुली दलील थी कि बयअ़ते रिज़वान में शामिल होने वाले तमाम सहाबा अल्लाह के सच्चे वली और महबूब थे।


[61] सिरात-ए-मुस्तक़ीम पर साबितक़दमी

अल्लाह ने उन्हें ईमान, यक़ीन और शुक्रे-इलाही के सीधे रास्ते पर हमेशा क़ायम रखा।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now