कुरान - 25:34 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
ٱلَّذِينَ يُحۡشَرُونَ عَلَىٰ وُجُوهِهِمۡ إِلَىٰ جَهَنَّمَ أُوْلَـٰٓئِكَ شَرّٞ مَّكَانٗا وَأَضَلُّ سَبِيلٗا

Transliteration: (Allazeena yuhsharoona 'alaa wujoohihim ilaa jahannama ulaaa'ika sharrun makaananw wa adallu sabeelaa (section 3))

जो लोग अपने चेहरों के बल जहन्नम की तरफ़ हांक कर इकट्ठा किए जाएंगे, वही लोग ठिकाने के एतबार से भी सबसे बुरे हैं और रास्ते के एतबार से भी सबसे ज़्यादा भटके हुए हैं [64]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 34

"जो चेहरों के बल जहन्नम की तरफ़ हांक कर इकट्ठा किए जाएंगे, वही सबसे बुरे ठिकाने वाले और सबसे ज़्यादा भटके हुए हैं [64]!"

[64] चेहरों के बल जहन्नम में घसीटा जाना और बदतरीन अंजाम

सहाबा-ए-किराम ने अर्ज़ किया: या रसूलल्लाह! काफ़िर चेहरों के बल कैसे चलेंगे? हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया: जिसने उन्हें दुनिया में पैरों पर चलाया, वह इस पर भी क़ादिर है कि क़ियामत के दिन उन्हें चेहरों के बल चलाए। चूँकि दुनिया में उन्होंने तकब्बुर से अपनी गर्दनों को अकड़ाया था, इसलिए हश्र के मैदान में उन्हें औंधे मुंह घसीट कर जहन्नम में फेंका जाएगा। वे ही लोग ठिकाने के एतबार से सबसे बुरे और गुमराही में सबसे आगे हैं।

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