Transliteration: (Innal laaha yudaafi' 'anil lazeena aamanoo; innal laaha laa yuhibbu kulla khawwaanin kafoor (section 5))
"बेशक अल्लाह उन लोगों की तरफ़ से (बलाओं व दुश्मनों का) दिफ़ाअ फ़रमाता है जो ईमान लाए हैं [88]; बेशक अल्लाह किसी ख़ियानत करने वाले, नाशुकरे को पसंद नहीं करता।"
अल्लाह तआला अपने ईमानदार बन्दों की हिफ़ाज़त दुश्मनों के शर और मुसीबतों से फ़रमाता है:
कभी उनके नेक आमाल की बरकत से।
कभी अपने महबूब व मुक़र्रब बन्दों (औलिया व सुल्हा) के वसीले व बरकत से।
और कभी ख़ालिस अपने लुत्फ़ व करम से।
यह हिफ़ाज़त दुनिया में भी होती है और आख़िरत में भी। लेकिन जो लोग अमानत में ख़ियानत करते हैं और अल्लाह की नेमतों की ना-शुक्री करते हैं, वे अल्लाह की रहमत और महबूबियत से महरूम रहते हैं।
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