Transliteration: (Zaalika bi annal laaha yoolijul laila fin nahaari wa yoolijun nahaara fil laili wa annal laaha Samee'um Baseer)
"यह इसलिए कि अल्लाह ही रात को दिन में दाख़िल करता है और दिन को रात में दाख़िल करता है, और बेशक अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ देखने वाला है [127] ।"
जिस तरह अल्लाह तआला मौसमों के बदलने से रात को दिन में और दिन को रात में दाख़िल फ़रमाता है (कभी दिन बड़े और रातें छोटी, और कभी रातें बड़ी और दिन छोटे होते हैं), उसी तरह दुनिया में अहले ईमान और कुफ़्फ़ार के इक़्तिदार में उलट-फेर उसकी हिकमत के तहत होता है। मोमिनीन को कभी आज़माइश से गुज़रना पड़े तो मायूस न हों, क्योंकि तारीख़ का रुख़ बदलने की क़ुदरत सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। अल्लाह सब की पुकार सुनता है और सब के हालात देखता है।
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