कुरान - 22:63 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَتُصۡبِحُ ٱلۡأَرۡضُ مُخۡضَرَّةًۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَطِيفٌ خَبِيرٞ

Transliteration: (Alam tara annal laaha anzala minas samaaa'i maaa'an fatusbihul ardu mukhdarrah; innal laaha Lateefun Khabeer)

63. क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह आसमान से पानी बरसाता है [129], तो ज़मीन हरी-भरी हो जाती है [130]? बेशक अल्लाह बड़ा बारीकबीन (लुत्फ़ वाला), बड़ा बाख़बर है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 63 की तफ़सीर

"क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह आसमान से पानी बरसाता है [129], तो ज़मीन हरी-भरी हो जाती है [130]? बेशक अल्लाह बड़ा बारीकबीन (लुत्फ़ वाला), बड़ा बाख़बर है।"

[129] बारिश: क़ुदरत-ए-इलाही का करिश्मा

अगरचे बारिश के ज़ाहिरी अस्बाब (भाप, बादल, हवाएं) होते हैं, मगर अस्ल फ़ाअ़िल और हुक्म फ़रमाने वाला अल्लाह तआला है। जब तक उसका हुक्म न हो, बादल पानी की एक बूंद भी नहीं गिरा सकते।

[130] मुर्दा ज़मीन का ज़िन्दा होना और हश्र की दलील

जिस तरह सूखी, बे-जान और बंजर ज़मीन पानी पड़ते ही ताज़ा होकर लहलहा उठती है, ठीक उसी तरह अल्लाह तआला क़ियामत के दिन मुर्दा इंसानों को दोबारा ज़िन्दा फ़रमाएगा। इसी तरह जब अहले ईमान पर ज़ुल्म के दौर गुज़रते हैं, तो अल्लाह अपनी रहमत की बारिश से उनके चमन को दोबारा हरा-भरा फ़रमा देता है।

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