कुरान - 22:62 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

62
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡحَقُّ وَأَنَّ مَا يَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦ هُوَ ٱلۡبَٰطِلُ وَأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡعَلِيُّ ٱلۡكَبِيرُ

Transliteration: (Zaalika bi annal laaha Huwal haqqu wa anna maa yad'oona min doonihee huwal baatilu wa annal laaha Huwal 'Aliyyul kabeer)

62. यह इसलिए कि अल्लाह ही हक़ है, और उसके सिवा जिसे वे पुकारते हैं वह सब बातिल है [128]; और बेशक अल्लाह ही सबसे बुलंद, सबसे बड़ा है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 62 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 62 की तफ़सीर

"यह इसलिए कि अल्लाह ही हक़ है, और उसके सिवा जिसे वे पुकारते हैं वह सब बातिल है [128]; और बेशक अल्लाह ही सबसे बुलंद, सबसे बड़ा है।"

[128] अल्लाह ही हक़ है और माबूदाने बातिला बे-हक़ीक़त हैं

अल्लाह तआला ही वाजिबुल वजूद और हक़ीक़ी माबूद है, और उसके सिवा जिन बुतों या मख़लूक़ात की मुशरिक पूजा करते हैं वे सब फ़ानी, बे-हक़ीक़त और बातिल हैं।

यहाँ यह बात याद रखनी चाहिए कि अम्बिया-ए-किराम और औलिया-ए-इज़ाम सच्चे हैं और हक़ वाले हैं; काफ़िर जिन मूरतों और बुतों की इबादत करते थे वे बातिल हैं। अम्बिया व औलिया को माबूद नहीं माना जाता बल्कि अल्लाह का महबूब और मुक़र्रब माना जाता है।

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