कुरान - 22:64 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
لَّهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهُوَ ٱلۡغَنِيُّ ٱلۡحَمِيدُ

Transliteration: (Lahoo ma fis samaawaati wa ma fil ard; wa innal laaha la Huwal Ghaniyyul Hameed (section 8))

64. उसी का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है [131]; और बेशक अल्लाह ही बेनियाज़ (ग़नी), तमाम तारीफ़ों के लायक़ (हमीद) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 64 की तफ़सीर

"उसी का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है [131]; और बेशक अल्लाह ही बेनियाज़ (ग़नी), तमाम तारीफ़ों के लायक़ (हमीद) है।"

[131] आसमान व ज़मीन की हक़ीक़ी मिलकियत

कायनात की हर शै का हक़ीक़ी मालिक सिर्फ़ अल्लाह है। इंसानों को जो कुछ मिलता है वह मज़ाज़ी और आरज़ी तौर पर अल्लाह की अता से होता है। अल्लाह किसी की इबादत या शुक्रगुज़ारी का मोहताज नहीं; तमाम इंसान मिलकर भी नाफ़रमानी करें तो उसकी शान में कोई कमी नहीं आती, और सब सजदा करें तो उसकी बड़ाई में कोई इज़ाफ़ा नहीं होता। वह ज़ातन ग़नी और हम्द के लायक़ है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now