कुरान - 22:66 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
وَهُوَ ٱلَّذِيٓ أَحۡيَاكُمۡ ثُمَّ يُمِيتُكُمۡ ثُمَّ يُحۡيِيكُمۡۗ إِنَّ ٱلۡإِنسَٰنَ لَكَفُورٞ

Transliteration: (Wa Huwal lazee ahyaakum summa yumeetukum summa yuhyeekum; innal insaana la kafoor)

66. और वही है जिसने तुम्हें ज़िन्दगी बख़्शी [135], फिर वही तुम्हें मौत देगा, फिर वही तुम्हें दोबारा ज़िन्दा करेगा; बेशक इंसान बड़ा ही नाशुकरा है [136] ! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 66 की तफ़सीर

"और वही है जिसने तुम्हें ज़िन्दगी बख़्शी [135], फिर वही तुम्हें मौत देगा, फिर वही तुम्हें दोबारा ज़िन्दा करेगा; बेशक इंसान बड़ा ही नाशुकरा है [136] !"

[135] हयात व ममात का निज़ाम

इंसान पहले कुछ न था, अल्लाह ने उसे मिट्टी और नुत्फ़े से हयात बख़्शी। फिर मुक़र्रर मुद्दत पूरी होने पर वह उसे मौत देगा, और फिर क़ियामत के दिन हिसाब-किताब के लिए दोबारा ज़िन्दा फ़रमाएगा। ज़िंदगी और मौत का यह पूरा चक्कर सिर्फ़ अल्लाह की क़ुदरत में है।

[136] इंसान की ना-शुक्री

अल्लाह के इतने एहसानात और ज़िन्दगी की नेमत के बावजूद अक्सर इंसान शिर्क और नाफ़रमानी में मुब्तला होकर ना-शुक्री का मुज़ाहरा करते हैं और आख़िरत की तैयारी से ग़ाफ़िल रहते हैं।

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