Transliteration: (Likulli ummatin ja'alnaa mansakan hum naasikoohu falaa yunaazi 'unnaka fil amr; wad'u ilaa Rabbika innaka la 'alaa hudan mustaqeem)
"हमने हर उम्मत के लिए इबादत का एक तरीक़ा (मनसक) मुक़र्रर किया है जिस पर वे अमल करने वाले हैं [137]; पस वे इस मुआमले में आपसे हरगिज़ झगड़ा न करें; और आप अपने रब की तरफ़ बुलाते रहिए [138]; बेशक आप बिल्कुल सीधी राह पर हैं [139] ।"
यह आयत बुदैल बिन वरक़ा और मुशरिकीन के ऐतराज़ के जवाब में नाज़िल हुई जो मुसलमानों से कहते थे कि 'तुम खुद अपने हाथ से ज़ब्ह किए हुए जानवर को हलाल कहते हो और जिसे अल्लाह ने मारा (यानी मुरदार) उसे हराम कहते हो!' अल्लाह ने फ़रमाया कि हर शरीअत में इबादत और ज़ब्ह के ख़ास क़वानीन मुक़र्रर किए गए हैं। वही जानवर हलाल है जिसे अल्लाह के नाम पर मसनून तरीक़े से ज़ब्ह करके ख़ून बहाया गया हो; मुरदार हर शरीअत में नापाक और हराम रहा है।
दीगर अम्बिया-ए-किराम अल्लाह की सिफ़ात की तरफ़ दावत देते थे, जबकि हुज़ूर अकरम ﷺ अल्लाह की ज़ात (ऐने तौहीद) की तरफ़ दावत देते हैं: 'व दाइयन इलल्लाहि बिइज़्निही'। आप ﷺ की यह दावत क़ियामत तक जारी है और उलमा व औलिया उसी के मुबल्लिग़ हैं।
हुज़ूर अकरम ﷺ सरापा सिराते मुस्तक़ीम हैं। आप ﷺ का तरीक़ा, आपकी सुन्नत और आपका दामन थामना ही सीधे रास्ते पर क़ायम रहने की ज़मानत है।
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