कुरान - 15:11 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
وَمَا يَأۡتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ

Transliteration: (Wa maa yaateehim mir Rasoolin illaa kaanoo bihee yastahzi'oon)

और उनके पास कोई रसूल ऐसा नहीं आता जिसका वे मज़ाक़ न उड़ाते हों। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 11 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

और उनके पास कोई रसूल ऐसा नहीं आता जिसका वे मज़ाक़ न उड़ाते हों।

रसूलों के साथ काफ़िरों के मज़ाक़ की रवायत

पिछली तमाम क़ौमों के पास जब भी कोई रसूल अल्लाह का पैग़ाम और हिदायत लेकर आए, तो मुनकिरीन ने उनका मज़ाक़ उड़ाया और उन्हें झुठलाया। यह आयत नबी करीम ﷺ को तसल्ली देती है कि आपकी क़ौम का यह रवैया कोई नई बात नहीं है, बल्कि हर दौर के सरकशों का यही तरीक़ा रहा है।

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