कुरान - 15:12 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
كَذَٰلِكَ نَسۡلُكُهُۥ فِي قُلُوبِ ٱلۡمُجۡرِمِينَ

Transliteration: (kazaalika naslukuhoo fee quloobil mujrimeen)

इसी तरह हम इस मज़ाक़ को मुजरिमों के दिलों में राह देते हैं [15] (दाख़िल करते हैं)। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 12 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

इसी तरह हम इस मज़ाक़ को मुजरिमों के दिलों में राह देते हैं [15] (दाख़िल करते हैं)।

[15] मुजरिमों के दिलों में कुफ़्र व मज़ाक़ का दाख़िला

इससे दो अहम मसले मालूम हुए:

  1. जिस दिल पर ईमान की मुहर लगी हो, उसमें अम्बिया किराम की बेअदबी, मज़ाक़ और कुफ़्र कभी दाख़िल नहीं हो सकता।

  2. अल्लाह तआला हर चीज़ का ख़ालिक़ है। इन्सान अस्बाब इख़्तियार करता है; काफ़िर कुफ़्र के अस्बाब अपनाते हैं, चुनाँचे अल्लाह तआला उनके दिलों में कुफ़्र पैदा फ़रमा देता है — जैसे कोई इन्सान किसी को क़त्ल करे तो मौत अल्लाह की तरफ़ से ही आती है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now