कुरान - 15:13 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
لَا يُؤۡمِنُونَ بِهِۦ وَقَدۡ خَلَتۡ سُنَّةُ ٱلۡأَوَّلِينَ

Transliteration: (Laa yu'minoona bihee wa qad khalat sunnatul awwaleen)

वे इस पर ईमान नहीं लाते और बेशक अगलों की रवायत (हलाकत का दस्तूर) गुज़र चुकी है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 13 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

वे इस पर ईमान नहीं लाते और बेशक अगलों की रवायत (हलाकत का दस्तूर) गुज़र चुकी है।

हक़ के इनकार का अंजाम

काफ़िर क़ुरआन और हुज़ूर अकरम ﷺ पर ईमान नहीं लाते, हालाँकि वे जानते हैं कि पिछली जिन क़ौमों ने अपने नबियों को झुठलाया, उन पर अल्लाह का कैसा दर्दनाक अज़ाब नाज़िल हुआ। वे पिछली क़ौमों के अंजाम से इबरत हासिल नहीं करते।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now