Transliteration: (Laqaaloo innamaa sukkirat absaarunaa bal nahnu qawmum mashooroon)
तब भी यही कहेंगे कि "हमारी आँखों को बाँध दिया गया है [16], बल्कि हम पर जादू कर दिया गया है [17]।"
यहाँ इस बात की तरफ़ इशारा है कि जिस दिल में हुज़ूर अकरम ﷺ का बुग़्ज़ व कीना हो, उसे कभी ईमान की हिदायत नसीब नहीं हो सकती। जिस ख़ुशक़िस्मत को ईमान की दौलत मिलनी होती है, सबसे पहले उसके दिल में नबी करीम ﷺ की मोहब्बत और अज़मत डाली जाती है।
इससे मालूम हुआ कि जब दिल में हक़ और नबी के ख़िलाफ़ दुश्मनी और हसद बैठ जाए, तो बड़े से बड़ा मोजिज़ा भी उसके किसी काम नहीं आता। काफ़िरों का इनकार उनकी दुश्मनी की वजह से था, जिसने उन्हें हक़ देखने से अंधा कर दिया था।
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