कुरान - 15:15 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
لَقَالُوٓاْ إِنَّمَا سُكِّرَتۡ أَبۡصَٰرُنَا بَلۡ نَحۡنُ قَوۡمٞ مَّسۡحُورُونَ

Transliteration: (Laqaaloo innamaa sukkirat absaarunaa bal nahnu qawmum mashooroon)

तब भी यही कहेंगे कि "हमारी आँखों को बाँध दिया गया है [16], बल्कि हम पर जादू कर दिया गया है [17]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 15 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

तब भी यही कहेंगे कि "हमारी आँखों को बाँध दिया गया है [16], बल्कि हम पर जादू कर दिया गया है [17]।"

[16] दिलों का बुग़्ज़ और हठधर्मी

यहाँ इस बात की तरफ़ इशारा है कि जिस दिल में हुज़ूर अकरम ﷺ का बुग़्ज़ व कीना हो, उसे कभी ईमान की हिदायत नसीब नहीं हो सकती। जिस ख़ुशक़िस्मत को ईमान की दौलत मिलनी होती है, सबसे पहले उसके दिल में नबी करीम ﷺ की मोहब्बत और अज़मत डाली जाती है।

[17] दुश्मनी और हसद का वबाल

इससे मालूम हुआ कि जब दिल में हक़ और नबी के ख़िलाफ़ दुश्मनी और हसद बैठ जाए, तो बड़े से बड़ा मोजिज़ा भी उसके किसी काम नहीं आता। काफ़िरों का इनकार उनकी दुश्मनी की वजह से था, जिसने उन्हें हक़ देखने से अंधा कर दिया था।

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