Transliteration: (Qaala lam akul li asjuda libasharin khalaqtahoo min salsaalim min hama im masnoon)
बोला, "मुझे ज़ेबा नहीं कि मैं एक बशर को सजदा करूँ जिसे तूने बजती हुई मिट्टी से बनाया जो सड़े काले गारे से थी [40]।"
इससे चन्द अहम बातें मालूम हुईं:
कायनात में सबसे पहले शैतान ने नबी को 'बशर' कहकर बराबरी का दावा किया था। अब जो कोई नबी को आम बशर कहकर बराबरी का दावा करे, वह शैतान के तरीक़े पर है।
शैतान ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का ख़ाकी जिस्म देखा था, उनका नूर और रूह नहीं देखी थी। चुनाँचे जिसकी नज़र नबी की सिर्फ़ बशरी हालत पर रहे, उसका अंजाम भी शैतान जैसा होता है।
हुक्म-ए-इलाही के मुक़ाबले में अपनी राय और अक़्ल लड़ाना शैतानी अमल है; क़तई हुक्म के ख़िलाफ़ क़ियास बातिल है।
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