कुरान - 15:34 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
قَالَ فَٱخۡرُجۡ مِنۡهَا فَإِنَّكَ رَجِيمٞ

Transliteration: (Qaala fakhruj minhaa fa innaka rajeem)

फ़रमाया, "तो यहाँ से निकल जा कि बेशक तू मरदूद (धुतकारा हुआ) है [41]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 34 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

फ़रमाया, "तो यहाँ से निकल जा कि बेशक तू मरदूद (धुतकारा हुआ) है [41]।"

[41] शैतान की दरगाह-ए-इलाही से रुसवाई

इससे दो बातें मालूम हुईं:

  1. जाहिलों की बेहूदा बातों का जवाब न देना अल्लाह तआला की सुन्नत है। देखिए कि अल्लाह ने शैतान की फ़ुज़ूल बातों का जवाब देने के बजाय उसे निकाल बाहर किया। इससे सबक़ मिलता है कि बेबुनियाद बहस में पड़ने के बजाय ख़ामोशी और दूरी बेहतर है।

  2. जब तक गुनाह ज़ाहिर न हो जाए, उस पर सज़ा जारी नहीं होती। अल्लाह तआला को पहले से उसके अंजाम का इल्म था, मगर जब उसकी नाफ़रमानी ज़ाहिर हो गई, तब उसे दरगाह से निकाला गया।

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