कुरान - 15:36 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
قَالَ رَبِّ فَأَنظِرۡنِيٓ إِلَىٰ يَوۡمِ يُبۡعَثُونَ

Transliteration: (Qaala Rabbi fa anzirneee ilaa Yawmi yub'asoon)

बोला, "ऐ मेरे रब! फिर मुझे उस दिन तक मोहलत दे जब लोग दोबारा उठाए जाएँ [43]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 36 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

बोला, "ऐ मेरे रब! फिर मुझे उस दिन तक मोहलत दे जब लोग दोबारा उठाए जाएँ [43]।"

[43] शैतान की तवील उम्र की दुआ

शैतान ने मौत से बचने के लिए क़यामत तक की ज़िन्दगी माँगी थी, क्योंकि क़यामत के बाद मौत का वक़्त ख़त्म हो जाएगा। मगर उसकी यह दुआ पूरी तरह क़ुबूल नहीं हुई; उसे सिर्फ़ पहले सूर फूँके जाने तक की मोहलत दी गई। पहले सूर पर शैतान भी दूसरे तमाम जानदारों की तरह मर जाएगा और चालीस साल तक मुर्दा रहेगा; फिर दूसरे सूर पर अज़ाब भुगतने के लिए दोबारा उठाया जाएगा (तफ़सीरे रूहुल बयान)।

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