Transliteration: (Qaala innakum qawmum munkaroon)
कहा, "बेशक तुम लोग कुछ अजनबी मालूम होते हो [72]।"
इससे मालूम हुआ कि जब फ़रिश्ते वही (आसमानी पैग़ाम) लेकर न आए हों, तो नबी का उन्हें न पहचानना मुमकिन है। अलबत्ता वही के वक़्त पहचानना लाज़मी है वर्ना कलाम-ए-इलाही में शुबहा पड़ सकता है। हज़रत लूत अलैहिस्सलाम का मक़सद यह था कि: "तुम न यहाँ के बाशिन्दे मालूम होते हो और न तुम पर सफ़र के आसार हैं; तो तुम कौन हो?" यह सवाल एहतिहात और हिकमत पर मब्नी था।
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