कुरान - 15:62 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

62
قَالَ إِنَّكُمۡ قَوۡمٞ مُّنكَرُونَ

Transliteration: (Qaala innakum qawmum munkaroon)

कहा, "बेशक तुम लोग कुछ अजनबी मालूम होते हो [72]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 62 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 62 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

कहा, "बेशक तुम लोग कुछ अजनबी मालूम होते हो [72]।"

[72] ग़ैर-वही में फ़रिश्तों की पहचान

इससे मालूम हुआ कि जब फ़रिश्ते वही (आसमानी पैग़ाम) लेकर न आए हों, तो नबी का उन्हें न पहचानना मुमकिन है। अलबत्ता वही के वक़्त पहचानना लाज़मी है वर्ना कलाम-ए-इलाही में शुबहा पड़ सकता है। हज़रत लूत अलैहिस्सलाम का मक़सद यह था कि: "तुम न यहाँ के बाशिन्दे मालूम होते हो और न तुम पर सफ़र के आसार हैं; तो तुम कौन हो?" यह सवाल एहतिहात और हिकमत पर मब्नी था।

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