कुरान - 15:63 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
قَالُواْ بَلۡ جِئۡنَٰكَ بِمَا كَانُواْ فِيهِ يَمۡتَرُونَ

Transliteration: (Qaaloo bal ji'naaka bimaa kaanoo feehi yamtaroon)

वे बोले, "बल्कि हम तो आपके पास वह (अज़ाब) लाए हैं जिसमें ये लोग शक करते थे [73]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 63 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

वे बोले, "बल्कि हम तो आपके पास वह (अज़ाब) लाए हैं जिसमें ये लोग शक करते थे [73]।"

[73] शक और इनकार की हक़ीक़त

यानी वह अज़ाब-ए-इलाही जिससे आप उन्हें डराते थे और वे मुसलसल उसका इनकार करते रहे, अब आ पहुँचा है। यहाँ 'शक' से मुराद क़तई इनकार है, क्योंकि नबी की ख़बर में शक करना भी कुफ़्र और इनकार के बराबर है।

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