कुरान - 15:65 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

65
فَأَسۡرِ بِأَهۡلِكَ بِقِطۡعٖ مِّنَ ٱلَّيۡلِ وَٱتَّبِعۡ أَدۡبَٰرَهُمۡ وَلَا يَلۡتَفِتۡ مِنكُمۡ أَحَدٞ وَٱمۡضُواْ حَيۡثُ تُؤۡمَرُونَ

Transliteration: (Fa asri bi ahlika biqit'im minal laili wattabi' adbaarahum wa laa yaltafit minkum ahadunw wamdoo haisu tu'maroon)

"तो अपने घर वालों को कुछ रात रहे लेकर निकल जाओ [74] और आप उनके पीछे चलो [75] और तुम में से कोई पीछे मुड़कर न देखे, और जहाँ का तुम्हें हुक्म दिया जा रहा है सीधे चले जाओ [76]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 65 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 65 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"तो अपने घर वालों को कुछ रात रहे लेकर निकल जाओ [74] और आप उनके पीछे चलो [75] और तुम में से कोई पीछे मुड़कर न देखे, और जहाँ का तुम्हें हुक्म दिया जा रहा है सीधे चले जाओ [76]।"

[74] शहर में ईमान वालों की क़िल्लत और अज़ाब का क़ानून

इससे मालूम हुआ कि हज़रत लूत अलैहिस्सलाम के कुछ घर वालों के सिवा उस पूरी बस्ती में कोई मोमिन नहीं था। जब तक किसी बस्ती में नेक बन्दे मौजूद हों, वहाँ अज़ाब नहीं आता; इसलिए अज़ाब से पहले मोमिनीन को बस्ती से बाहर निकाल लिया गया।

[75] क़ाफ़िले के पीछे चलने की हिकमत

हज़रत लूत अलैहिस्सलाम को पीछे चलने का हुक्म इसलिए हुआ ताकि कोई पीछे छूट न जाए और आप सबकी निगरानी फ़रमाएँ। इससे मालूम हुआ कि क़ौम का राहनुमा और मुहाफ़िज़ क़ाफ़िले की हिफ़ाज़त के लिए पीछे भी रह सकता है।

[76] सलामती की मंज़िल (मुल्क-ए-शाम)

हुक्म दिया गया कि सीधे मुल्क-ए-शाम की तरफ़ चले जाओ, जो सलामती और अमन का मक़ाम था।

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