Transliteration: (Wa qadainaaa ilaihi zaalikal amra anna daabira haaa'ulaaa'i maqtoo'um musbiheen)
और हमने उसकी तरफ़ यह फ़ैसला वह्य कर दिया कि सुबह होते-होते इनकी जड़ काट दी जाएगी [77]।
'जड़ कटने' से मुराद यह है कि उन काफ़िरों की कोई नस्ल या औलाद बाक़ी न रहेगी जो उनकी नसल को आगे बढ़ा सके; उनका नामोनिशान मिटा दिया जाएगा। याद रहे कि ऐसी आम हलाकत की सज़ा हमारे प्यारे आक़ा हुज़ूर अकरम ﷺ की मुबारक आमद के बाद उम्मत से उठा ली गई है।
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