कुरान - 15:68 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

68
قَالَ إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ ضَيۡفِي فَلَا تَفۡضَحُونِ

Transliteration: (Qaala inna haaa'ulaaa'i daifee falaa tafdahoon)

लूत ने कहा, "ये मेरे मेहमान हैं, तो मुझे रुसवा न करो [79]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 68 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 68 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

लूत ने कहा, "ये मेरे मेहमान हैं, तो मुझे रुसवा न करो [79]।"

[79] मेहमान-नवाज़ी अम्बिया की सुन्नत

इससे मालूम हुआ कि मेहमान की इज़्ज़त करना और उसकी आबरू की हिफ़ाज़त करना अम्बिया किराम का तर्ज़-ए-ज़िंदगी है, चाहे मेहमान से पहले की जान-पहचान न भी हो।

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