कुरान - 15:70 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

70
قَالُوٓاْ أَوَلَمۡ نَنۡهَكَ عَنِ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Qaalooo awalam nanhaka 'anil 'aalameen)

वे बोले, "क्या हमने तुम्हें जहान वालों (को ठहराने) से मना नहीं किया था [81]?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 70 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 70 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

वे बोले, "क्या हमने तुम्हें जहान वालों (को ठहराने) से मना नहीं किया था [81]?"

[81] मुसाफ़िरों को पनाह देने से रोकना

यानी क्या हमने तुम्हें मुसाफ़िरों को अपने घर पनाह देने से नहीं रोका था? वे बदबख़्त मुसाफ़िरों को सताते थे, और हज़रत लूत अलैहिस्सलाम मुसाफ़िरों की मदद फ़रमाते थे जो उन ज़ालिमों को नागवार गुज़रता था।

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