कुरान - 15:72 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

72
لَعَمۡرُكَ إِنَّهُمۡ لَفِي سَكۡرَتِهِمۡ يَعۡمَهُونَ

Transliteration: (La'amruka innahum lafee sakratihim ya'mahoon)

(ऐ महबूब!) तुम्हारी जान की क़सम [83], बेशक वे अपने नशे में अंधे होकर भटक रहे थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 72 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 72 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

(ऐ महबूब!) तुम्हारी जान की क़सम [83], बेशक वे अपने नशे में अंधे होकर भटक रहे थे।

[83] हुज़ूर अकरम ﷺ की हयात-ए-मुबारक की क़सम

इससे मालूम हुआ कि हुज़ूर अकरम ﷺ की मुबारक ज़िन्दगी अल्लाह तआला की बारगाह में तमाम कायनात से ज़्यादा अज़ीज़ व महबूब है, क्योंकि अल्लाह तआला ने पूरे क़ुरआन में अपने महबूब के सिवा किसी की ज़िन्दगी की क़सम नहीं खाई ('ल-अमरुक')। इसके अलावा जो अक़्ल भले-बुरे में तमीज़ न कर सके, वह अक़्ल नहीं बल्कि अंधापन है। वे बदकार अपनी वासना और सरकशी के नशे में अंधे होकर भटक रहे थे।

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