Transliteration: (Fa akhazat humus saihatu mushriqeen)
तो सूरज निकलते-निकलते उन्हें एक भयानक चीख़ (कड़क) ने आ पकड़ा [84]।
यह क़ौम-ए-लूत पर आने वाले अज़ाब की शुरुआत थी। सूरज निकलते वक़्त जब वे बेख़बर थे, आसमान से एक भयानक और दिल दहला देने वाली कड़कती चीख़ (सयहा) आई जिसने उनके कलेजे फाड़ दिए और उन्हें हलाक कर दिया।
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