Transliteration: (Inna fee zaalika la Aayaatil lilmutawassimeen)
बेशक इसमें निशानियाँ हैं फ़िरासत (समझ) रखने वालों के लिए [87]।
क़ौम-ए-लूत की तबाही महज़ कोई क़िस्सा नहीं है, बल्कि गहरी नज़र, अक़्ल और रूहानी फ़िरासत रखने वालों (अल-मुतवस्सिमीन) के लिए खुली निशानी है कि अल्लाह के अहकाम तोड़ने वाली क़ौमों का अंजाम कितना ख़ौफ़नाक होता है।
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