Transliteration: (Wa innahaa labi sabeelim muqeem)
और बेशक वह बस्ती एक ऐसे रास्ते पर है जो अब तक चलता है [88]।
क़ौम-ए-लूत की तबाहशुदा बस्तियाँ शाम (सीरिया) जाने वाले उस आम रास्ते (बहर-ए-मुर्दार / Dead Sea के पास) पर मौजूद हैं जहाँ से मक्का के तिजारती क़ाफ़िले अक्सर गुज़रते थे। अल्लाह ने इन खण्डहरों को बाक़ी रखा ताकि मुसाफ़िर अपनी आँखों से देखकर इब्रत व नसीहत हासिल करें।
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