Transliteration: (Inna fee zaalika la Aayatal lilmu'mineen)
बेशक इसमें ईमान वालों के लिए बड़ी निशानी है [87]।
ईमान, अक़्ल और बसीरत अल्लाह तआला की अज़ीम नेमतें हैं। बे-ईमान लोग ऐसी तबाही को महज़ इत्तिफ़ाक़ या क़ुदरती हादसा क़रार देकर गुज़र जाते हैं, जबकि साहिब-ए-ईमान इन्सान इसमें अल्लाह के क़हर और नाफ़रमानी के वबाल को देखकर अपने रब से डरता है और गुनाहों से तौबा करता है।
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