कुरान - 15:78 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

78
وَإِن كَانَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡأَيۡكَةِ لَظَٰلِمِينَ

Transliteration: (Wa in kaana Ashaabul Aikati lazaalimeen)

और बेशक घने जंगल वाले (क़ौम-ए-शुऐब) ज़रूर ज़ालिम थे [90]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 78 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 78 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

और बेशक घने जंगल वाले (क़ौम-ए-शुऐब) ज़रूर ज़ालिम थे [90]।

[90] असहाबुल ऐका (क़ौम-ए-शुऐब) का ज़ुल्म

'ऐका' घने जंगल और सरसब्ज़ बाग़ों को कहते हैं। यह हज़रत शुऐब अलैहिस्सलाम की क़ौम थी जिन्हें अल्लाह ने दुनियावी ख़ूबसूरती और खुशहाली अता फ़रमाई थी; मगर उन्होंने नाप-तौल में बेईमानी, डाकाज़नी और नबी की नाफ़रमानी की। दुनियावी दौलत उन्हें अल्लाह के अज़ाब से न बचा सकी।

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