Transliteration: (Fantaqamnaa minhum wa innahumaa labi imaamim mubeen (section 5))
तो हमने उनसे बदला लिया [91]; और बेशक ये दोनों बस्तियाँ एक खुले (साफ़) रास्ते पर हैं [92]।
अल्लाह तआला ने क़ौम-ए-शुऐब पर दहकते बादलों का साया भेजकर आग बरसाई और उनसे उनके ज़ुल्म का बदला लिया, जिससे साबित हुआ कि इन्साफ़-ए-इलाही हर ज़ालिम को उसके अंजाम तक पहुँचाता है।
क़ौम-ए-लूत और क़ौम-ए-शुऐब दोनों की बस्तियाँ शाम (सीरिया) के आम तिजारती रास्ते पर वाक़े हैं। अहले-मक्का बार-बार वहाँ से गुज़रते थे, लिहाज़ा उन्हें पिछली हलाकशुदा क़ौमों के अंजाम से नसीहत लेनी चाहिए थी।
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