कुरान - 15:79 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

79
فَٱنتَقَمۡنَا مِنۡهُمۡ وَإِنَّهُمَا لَبِإِمَامٖ مُّبِينٖ

Transliteration: (Fantaqamnaa minhum wa innahumaa labi imaamim mubeen (section 5))

तो हमने उनसे बदला लिया [91]; और बेशक ये दोनों बस्तियाँ एक खुले (साफ़) रास्ते पर हैं [92]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 79 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 79 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

तो हमने उनसे बदला लिया [91]; और बेशक ये दोनों बस्तियाँ एक खुले (साफ़) रास्ते पर हैं [92]।

[91] ज़ालिमों से इन्तिक़ाम-ए-इलाही

अल्लाह तआला ने क़ौम-ए-शुऐब पर दहकते बादलों का साया भेजकर आग बरसाई और उनसे उनके ज़ुल्म का बदला लिया, जिससे साबित हुआ कि इन्साफ़-ए-इलाही हर ज़ालिम को उसके अंजाम तक पहुँचाता है।

[92] खुले रास्ते पर दोनों बस्तियों के खण्डहर

क़ौम-ए-लूत और क़ौम-ए-शुऐब दोनों की बस्तियाँ शाम (सीरिया) के आम तिजारती रास्ते पर वाक़े हैं। अहले-मक्का बार-बार वहाँ से गुज़रते थे, लिहाज़ा उन्हें पिछली हलाकशुदा क़ौमों के अंजाम से नसीहत लेनी चाहिए थी।

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