Transliteration: (Wa aatainaahum Aayaatinaa fakaanoo 'anhaa mu'rideen)
और हमने उन्हें अपनी निशानियाँ दीं [92], तो वे उनसे मुँह मोड़े ही रहे [93]।
निशानियों से मुराद वह ऊँटनी है जो ठोस चट्टान से मोजिज़े के तौर पर निकली थी। वह निहायत अज़ीमुल-जुस्सा थी, उसने फ़ौरन बच्चा जना, अपनी बारी के दिन कुएँ का सारा पानी पी जाती थी और बदले में पूरी क़ौम को पीने भर दूध देती थी। एक ही मोजिज़े में कई हैरतअंगेज़ मोजिज़ाती सिफ़ात जमा थीं, इसलिए जमा के लफ़्ज़ 'निशानियाँ' से ताबीर फ़रमाया गया।
इन खुली निशानियों को देखने के बावजूद वे हक़ से मुँह मोड़े रहे। ईमान लाने के बजाय उन्होंने उस मोजिज़ाना ऊँटनी की कूचें काटकर उसे शहीद कर दिया। इससे साबित हुआ कि जिन्हें अल्लाह तआला हिदायत की तौफ़ीक़ बख़्शे, वही मोजिज़ा देखकर ईमान लाते हैं; वर्ना अंधे दिल वालों को बड़े से बड़ा मोजिज़ा भी हिदायत नहीं दे सकता।
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