Transliteration: (Wa kaanoo yanhitoona minal jibaali buyootan aamineen)
और वे पहाड़ों को तराश कर बे-ख़ौफ़ घर बनाते थे [94]।
क़ौम-ए-समूद संगतराशी और मेमारी में बड़ी माहिर थी। वे पहाड़ों के सीनों को काटकर मज़बूत महल बनाते थे और समझते थे कि वे हर आफ़त और ज़वाल से महफ़ूज़ हैं। मगर इस ज़ाहिरी ताक़त ने उन्हें तकब्बुर में मुब्तला कर दिया और वे अल्लाह के अज़ाब से बेख़ौफ़ हो गए। यह आयत सबक़ देती है कि हक़ीक़ी सलामती ईमान और आजिज़ी में है, दुनियावी क़िलों और पत्थरों में नहीं।
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