कुरान - 15:82 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

82
وَكَانُواْ يَنۡحِتُونَ مِنَ ٱلۡجِبَالِ بُيُوتًا ءَامِنِينَ

Transliteration: (Wa kaanoo yanhitoona minal jibaali buyootan aamineen)

और वे पहाड़ों को तराश कर बे-ख़ौफ़ घर बनाते थे [94]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 82 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 82 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

और वे पहाड़ों को तराश कर बे-ख़ौफ़ घर बनाते थे [94]।

[94] पहाड़ों की पनाह और झूठा घमंड

क़ौम-ए-समूद संगतराशी और मेमारी में बड़ी माहिर थी। वे पहाड़ों के सीनों को काटकर मज़बूत महल बनाते थे और समझते थे कि वे हर आफ़त और ज़वाल से महफ़ूज़ हैं। मगर इस ज़ाहिरी ताक़त ने उन्हें तकब्बुर में मुब्तला कर दिया और वे अल्लाह के अज़ाब से बेख़ौफ़ हो गए। यह आयत सबक़ देती है कि हक़ीक़ी सलामती ईमान और आजिज़ी में है, दुनियावी क़िलों और पत्थरों में नहीं।

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