Transliteration: (Wa laqad kazzaba ashaabul Hijril mursaleen)
और बेशक 'हिज्र' वालों (क़ौम-ए-समूद) ने भी रसूलों को झुठलाया [91]।
'हिज्र' मदीना मुनव्वरा और शाम के दरमियान वाक़े है, जहाँ क़ौम-ए-समूद रहती थी। उनके पास हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम आए थे; मगर क़ुरआन ने फ़रमाया कि उन्होंने 'रसूलों' को झुठलाया। इससे उसूल साबित हुआ कि एक नबी का इनकार तमाम अम्बिया का इनकार है। इसी तरह सहाबा-ए-किराम या अहले-बैत में से किसी एक की भी बेअदबी या गुस्ताख़ी तमाम से बेअदबी के मुतरादिफ़ है।
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