Transliteration: (Faja'alnaa 'aaliyahaa saafilahaa wa amtarnaa 'alaihim hijaaratam min sijjeel)
फिर हमने उस बस्ती का ऊपर का हिस्सा नीचे कर दिया [85] और उन पर पकी हुई मिट्टी के पत्थर बरसाए [86]।
हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के हुक्म से उस पूरी बस्ती को ऊपर उठाकर आसमान के क़रीब पहुँचाया, फिर उसे ज़मीन पर औंधा पटक दिया। चूँकि यह काम हज़रत जिब्रील ने अल्लाह के हुक्म से किया, इसलिए अल्लाह तआला ने फ़रमाया: "हमने कर दिया" — इससे साबित हुआ कि मक़बूल बन्दों के कामों को अल्लाह का काम फ़रमाना क़ुरआन की सुन्नत है।
बस्ती पलटने के बाद उन पर पकी हुई मिट्टी के ख़ास कंकरीले पत्थर बरसाए गए जिन पर मुजरिमों के नाम दर्ज थे। इससे बदकारी और अमले-कौमे-लूत की भयानक सज़ा ज़ाहिर होती है। फ़िक़्ह-ए-हनफ़ी में ऐसे बदकार के लिए क़ाज़ी-ए-इस्लाम सख़्त तरीन ताज़ीरी सज़ा (संगसारी या क़त्ल) मुक़र्रर कर सकता है।
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