कुरान - 15:8 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
مَا نُنَزِّلُ ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةَ إِلَّا بِٱلۡحَقِّ وَمَا كَانُوٓاْ إِذٗا مُّنظَرِينَ

Transliteration: (Maa nunazzilul malaaa'i kata illaa bilhaqqi wa maa kaanooo izam munzareen)

हम फ़रिश्तों को नहीं उतारते मगर हक़ के साथ और उस वक़्त उन्हें मोहलत न मिलेगी [11]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 8 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

हम फ़रिश्तों को नहीं उतारते मगर हक़ के साथ और उस वक़्त उन्हें मोहलत न मिलेगी [11]।

[11] फ़रिश्तों के उतरने का मक़सद

यानी फ़रिश्ते अपनी असली शक्ल में जब आते हैं, या काफ़िरों के लिए हमेशा अज़ाब लेकर आते हैं, हुज़ूर अकरम ﷺ पर वही लेकर आते हैं, और कुछ ख़ास नेक बन्दों के पास अल्लाह तआला की रहमत व बशारत लेकर आते हैं — जैसे हज़रत मरयम और हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की वालिदा माजिदा के पास फ़रिश्ते खुशखबरी लेकर आए थे।

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