Transliteration: (Maa nunazzilul malaaa'i kata illaa bilhaqqi wa maa kaanooo izam munzareen)
हम फ़रिश्तों को नहीं उतारते मगर हक़ के साथ और उस वक़्त उन्हें मोहलत न मिलेगी [11]।
यानी फ़रिश्ते अपनी असली शक्ल में जब आते हैं, या काफ़िरों के लिए हमेशा अज़ाब लेकर आते हैं, हुज़ूर अकरम ﷺ पर वही लेकर आते हैं, और कुछ ख़ास नेक बन्दों के पास अल्लाह तआला की रहमत व बशारत लेकर आते हैं — जैसे हज़रत मरयम और हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की वालिदा माजिदा के पास फ़रिश्ते खुशखबरी लेकर आए थे।
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