Transliteration: (Wa qaaloo yaaa aiyuhal lazee nuzzila 'alaihiz Zikru innaka lamajnoon)
और बोले, "ऐ वह शख़्स जिस पर क़ुरआन उतरा [8]! बेशक तुम ज़रूर दीवाने हो [9]।"
काफ़िरों का यह कहना क़ुरआन-ए-पाक की तस्दीक़ के लिए नहीं था बल्कि मज़ाक़ उड़ाने के तौर पर था। या इसका मतलब यह है कि "तुम्हारे ख़याल में" तुम पर क़ुरआन उतरा है; क्योंकि हक़ीक़त में काफ़िर क़ुरआन के उतरने को नहीं मानते थे। इसी वजह से आगे आयत 11 में फ़रमाया गया कि वे मज़ाक़ उड़ाते थे।
अब्दुल्लाह बिन उमय्या ने हुज़ूर अकरम ﷺ को (मआज़अल्लाह) दीवाना कहा था, फिर दूसरों ने उसकी पैरवी की (तफ़सीरे रूहुल बयान)। इससे मालूम हुआ कि नबी कभी दीवाना (पागल) नहीं हो सकता। अम्बिया किराम बहरेपन, गूँगेपन, दीवानेपन वग़ैरा तमाम ऐबों से पाक और महफ़ूज़ होते हैं; वे कायनात में सबसे आला अक़्ल के मालिक होते हैं।
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