कुरान - 15:7 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
لَّوۡ مَا تَأۡتِينَا بِٱلۡمَلَـٰٓئِكَةِ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ

Transliteration: (Law maa taateenaa bil malaaa'ikati in kunta minas saadiqeen)

"हमारे पास फ़रिश्तों को क्यों नहीं लाते अगर तुम सच्चे हो [10]?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 7 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"हमारे पास फ़रिश्तों को क्यों नहीं लाते अगर तुम सच्चे हो [10]?"

[10] फ़रिश्तों को लाने का मुतालबा

यानी ऐसे फ़रिश्ते जो ज़ाहिरी तौर पर आपकी मदद करें और आपकी सच्चाई की गवाही दें। इससे दो बातें मालूम होती हैं:

  1. अरब के मुश्रिकीन फ़रिश्तों के वजूद को मानते थे, बल्कि वे उन्हें (मआज़अल्लाह) अल्लाह की बेटियाँ क़रार देते थे।

  2. वे पत्थरों और कंकड़ों से कलिमा पढ़ता सुन चुके थे, इसलिए अब उन्होंने फ़रिश्तों का मुतालबा किया; वर्ना वे पत्थरों से कलिमा पढ़ने का मुतालबा करते।

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