कुरान - 15:5 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
مَّا تَسۡبِقُ مِنۡ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسۡتَـٔۡخِرُونَ

Transliteration: (Maa tasbiqu min ummatin ajalahaa wa maa yastaakhiroon)

कोई गिरोह अपने वक़्त से न आगे बढ़े और न पीछे हटे [7]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 5 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

कोई गिरोह अपने वक़्त से न आगे बढ़े और न पीछे हटे [7]।

[7] हर क़ौम का मुक़र्रर वक़्त

कोई क़ौम अपने मुक़र्ररा वक़्त से न पहले जा सकती है और न पीछे रह सकती है। हर क़ौम के उरूज व ज़वाल का वक़्त तय है, और कोई भी इसे बदल नहीं सकता — चाहे वह अज़ाब का वक़्त हो, इनाम का हो, या कोई भी ऐसा मामला जिसे अल्लाह तआला ने मुक़र्रर फ़रमा दिया है।

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