Transliteration: (Maa tasbiqu min ummatin ajalahaa wa maa yastaakhiroon)
कोई गिरोह अपने वक़्त से न आगे बढ़े और न पीछे हटे [7]।
कोई क़ौम अपने मुक़र्ररा वक़्त से न पहले जा सकती है और न पीछे रह सकती है। हर क़ौम के उरूज व ज़वाल का वक़्त तय है, और कोई भी इसे बदल नहीं सकता — चाहे वह अज़ाब का वक़्त हो, इनाम का हो, या कोई भी ऐसा मामला जिसे अल्लाह तआला ने मुक़र्रर फ़रमा दिया है।
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