कुरान - 15:4 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
وَمَآ أَهۡلَكۡنَا مِن قَرۡيَةٍ إِلَّا وَلَهَا كِتَابٞ مَّعۡلُومٞ

Transliteration: (Wa maaa ahlaknaa min qaryatin illaa wa lahaa kitaabum ma'loom)

और हमने किसी बस्ती को हलाक नहीं किया मगर इसके लिए एक जाना हुआ वक़्त लिखा हुआ था [6]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 4 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

और हमने किसी बस्ती को हलाक नहीं किया मगर इसके लिए एक जाना हुआ वक़्त लिखा हुआ था [6]।

[6] क़ौमों के अज़ाब का मुक़र्ररा वक़्त

हर क़ौम के अज़ाब का वक़्त लौह-ए-महफ़ूज़ में दर्ज है। वे मक़बूल व नेक बन्दे जिनकी नज़र लौह-ए-महफ़ूज़ पर होती है, वे इन तमाम मामलात से बाख़बर होते हैं; क्योंकि यह तहरीर अल्लाह तआला के लिए नहीं बल्कि उसके इन नेक बन्दों के लिए है। चुनाँचे अज़ाब के फ़रिश्ते इसी तहरीर के मुताबिक़ अज़ाब नाज़िल करते हैं, और अम्बिया किराम इसे पढ़कर पहले से ही इसके बारे में आगाह फ़रमा देते हैं।

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